आयुर्वेदिक दवाएं लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें

आयुर्वेदिक दवाएं लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें

लाखों गुणों से युक्त आयुर्वेदिक औषधियों में सभी प्रकार के रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता होती है। लेकिन आयुर्वेदिक दवाओं के ये गुण घातक भी साबित हो सकते हैं, अगर आप खुद इसका सेवन करते हैं। आयुर्वेदिक दवाएं कब और कैसे कर सकती हैं नुकसान, जानकारी दे रही हैं नितिका श्रीवास्तव

समय बीतने के साथ लोगों के रहनसहन में भी बदलाव आया है, लेकिन अगर आयुर्वेद की बात करें तो लोगों को अभी भी इस पर पूरा भरोसा है। कहा जाता है कि आयुर्वेदिक दवा कभी नुकसान नहीं करती। शरीर के किसी भी रोग को जड़ से खत्म करने के लिए आयुर्वेदिक औषधि से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इसी वजह से आजकल आयुर्वेदिक दवाओं की डिमांड भी काफी ज्यादा है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो आयुर्वेदिक इलाज पर इस कदर निर्भर होते हैं कि वे खुद ही आयुर्वेदिक दवाएं खाने लगते हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसा करना नुकसानदायक भी साबित हो सकता है।

नियम आवश्यक हैं

अगर आप खुद आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करते हैं तो आपको विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत है। इन दवाओं के भी अपने विशेष नियम हैं। अगर आप नियमों को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन नहीं करते हैं तो ये दवाएं आपके लिए भी परेशानी खड़ी कर सकती हैं। आयुर्वेदिक दवा लेने का कारण चाहे जो भी हो, अगर आप अपनी मर्जी से दवा लेते रहते हैं, तो आपके शरीर पर दवाओं का प्रभाव कम होने लगता है और जरूरत पड़ने पर संबंधित बीमारी के लिए सही दवा लेने से आपको फायदा नहीं होता है।

ऐसे नियमों को जानना जरूरी है

आयुर्वेदाचार्यों ने आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन के लिए कुछ नियम निर्धारित किए हैं, जिसके अनुसार इन औषधियों को लेने का सही समय सूर्योदय के समय, दिन में भोजन करते समय, शाम के भोजन के दौरान और रात में निर्धारित किया जाता है। कुछ लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है, जिससे उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसलिए ऐसी दवाओं का सेवन आयुर्वेदाचार्य के निर्देशानुसार ही करना चाहिए जो आपकी बीमारी का इलाज कर रहे हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या है

आपकी रसोई में मौजूद मसालों, जड़ीबूटियों या सब्जियों की मदद से कई स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। वैसे तो इन जड़ी बूटियों का इस्तेमाल सेहत के लिए सही माना जाता है, लेकिन बात वैज्ञानिक दृष्टिकोण से की जाए तो विशेषज्ञ इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार हर आयुर्वेदिक नुस्खा शरीर के लिए फायदेमंद होता है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती।

अति प्रयोग के नुकसान

अक्सर हर कोई आयुर्वेदिक दवाओं की उपयोगिता के बारे में बात करता है, लेकिन बहुत से लोग अन्य दवाओं के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के बीच प्रतिक्रिया के बारे में नहीं समझते हैं। ऐसे लोग किसी विशेष तत्व की अधिकता या किसी के दुष्परिणाम की परवाह नहीं करते, जो कि गलत है।

जानकारों के मुताबिक अति हर चीज की बुरी होती है। स्वास्थ्य को बनाए रखने वाली आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों का उपयोग करते समय हमें इसकी सही मात्रा का पता नहीं होता है और इसकी अधिक मात्रा हमारे लिए हानिकारक हो सकती है।

निर्धारित निर्देशों का पालन करें

यह मान लेना उचित नहीं है कि आयुर्वेदिक दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं। प्राचीन शोध ने कभी यह दावा नहीं किया है कि आयुर्वेदिक दवाओं के दुष्प्रभाव नहीं हो सकते हैं या उन्हें किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के बिना लिया जा सकता है।

हमारे शरीर में कई रसायन, एंजाइम, हार्मोन आदि समयसमय पर प्रतिरक्षा और शारीरिक जरूरतों के अनुसार बदलते रहते हैं। अगर आप आयुर्वेदिक दवाओं का इलाज खुद से करते हैं तो उसका असर नहीं होता और उल्टा आपके शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचता है। किसी भी स्थिति में आयुर्वेदिक औषधियां निर्धारित निर्देशों के अनुसार ही लेनी चाहिए।

अच्छा नहीं, ज्यादा गिलोय का सेवन

आयुर्वेद में गिलोय को अमृत भी कहा जाता है, जिसमें मधुमेह से लड़ने के गुण होते हैं। लेकिन इसका प्रयोग भी किसी आयुर्वेदाचार्य के परामर्श से ही करना चाहिए, क्योंकि इसका सेवन शुगर लेवल को प्रभावित कर पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे कब्ज की समस्या हो सकती है।

 

जामुन से कुछ दूरी रखें

डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए ज्यादातर लोग जामुन का सेवन करते हैं। आयुर्वेद की दृष्टि से जामुन स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा वरदान माना जाता है। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसके अधिक सेवन से व्यक्ति का पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है।

 

मेथी के बीज समस्या पैदा नहीं करते

मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पेट संबंधी समस्याओं के लिए मेथी के बीज सबसे ज्यादा फायदेमंद होते हैं। आयुर्वेदाचार्य स्वयं भी आयुर्वेदिक औषधियों में से एक मेथी के सेवन की सलाह देते हैं, लेकिन मेथी का स्वभाव बहुत गर्म होता है। इसके ओवरडोज से पित्त, गैस, डायरिया और खून के पतले होने का खतरा रहता है।

करेले का प्रयोग सावधानी से करें

करेला आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शरीर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन यह आपके पाचन तंत्र को पूरी तरह से खराब करने में भी सक्षम है। इसके बीजों में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो आंतों में प्रोटीन के संचरण को रोक सकता है। इसके जूस में मौजूद मोमोक्राइन नामक तत्व पीरियड्स के फ्लो को बढ़ाता है।

गर यह काम नहीं करता है, तो सावधान रहें

अगर आप खुद बिना किसी की सलाह के आयुर्वेदिक दवाएं लेते हैं तो आपको बेहद सावधान रहने की जरूरत है। जब ये दवाएं आपके लिए काम करना बंद कर देती हैं, तो इसका मतलब है कि या तो आपको इन्हें लेने का सही समय नहीं पता है या इन दवाओं की खुराक में वृद्धि या कमी हो रही है।


अगर आप किसी छोटी या बड़ी बीमारी से पीड़ित हैं और आयुर्वेदिक उपचार को प्राथमिकता देना चाहते हैं तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के दवा लेना भूलें। आम लोगों की सलाह से ज्यादा सफल सलाह किसी योग्य आयुर्वेदाचार्य से ही हो सकती है। तो इसका लाभ उठाएं और सही दवा का सेवन करें।

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